यूपीए का भ्रष्टाचार और मोदी सरकार का भ्रष्टाचार

यह एक सामान्य धारणा है कि CWG (कॉमनवेल्थ गेम्स) में भ्रष्टाचार हुआ था जैसा हमारे देश में सभी छोटे-बड़े निर्माण कार्यों में होता है। CWG के भ्रष्टाचार के मुख्य विलेन पूर्व रेल राज्य मंत्री तथा भारतीय ओलंपिक संघ के तत्कालीन अध्यक्ष एवं पुणे से कांग्रेस के सांसद सुरेश कलमाडी थे।

2G घोटाला तो पूरी तरह आभासी और काल्पनिक अनुमानों पर आधारित था। इस घोटाले के तात्कालिक विलेन ए. राजा और कलिमोली थे जो कि डीएमके के नेता हैं। सुप्रीम कोर्ट तक इस कथित घोटाले के कोई सबूत नहीं मिले हैं। लेकिन एक अच्छी-भली सरकार इस कथित घोटाले के चलते निपट गयी।

कोयला घोटाले में खदानों के आवंटन में जरूर भ्रष्टाचार हुआ होगा। यह कोई इकलौता घोटाला नहीं था। हमारे देश में नाली बनाने से लेकर बांध बनाने तक सभी निर्माण कार्यों में कमीशन खोरी, लेन-देन और भ्रष्टाचार एक सामान्य परम्परा बन चुका है। कोयला घोटाले में तत्कालीन कोयला मंत्री जायसवाल जो कि कांग्रेस के कानपुर से सांसद थे पर ऊंगली जरूर उठी थी लेकिन जब घोटाला उजागर हुआ उस समय कोयला मंत्रालय का प्रभार प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के पास था और डॉ. सिंह की ईमानदारी और निष्ठा पर ऊंगली उठाना सूरज को दीया दिखाने की तरह ही होगा!

अब आते हैं मोदी सरकार के घोटालों पर....!

क्या पिछले सात सालों में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ? रॉफेल का भ्रष्टाचार तो बोफोर्स से सौ गुना बड़ा ही होगा! लेकिन अब चूंकि देश का मीडिया बिक चुका है और सर्वोच्च न्यायपालिका ने भी हड़बड़ाहट में रॉफेल मामले में मोदी सरकार को क्लीन चिट दे दी है। विपक्ष भी असंगठित और बहुत कमजोर है इसलिये जनता में भी मुर्दों जैसी शांति छाई हुई है। 

आज भी नीचे से ऊपर तक भ्रष्टाचार की गंगा अनवरत बह रही है बल्कि पहले से भी कई गुना विकराल हो गयी है। बस तरीका बदल गया है। अब बैंकों से हजारों करोड़ रुपया लोन लेकर अपनी कंपनी को NPA में डलवा दो या हजारों करोड़ लेकर विदेशों में बस जाओ। नेताओं - मंत्रियों को उनका हिस्सा पनामा, मॉरीशस या किसी स्विस बैंक में जमा कर निश्चिंत हो जाओ। 

अब भ्रष्टाचार ने पूरी तरह से संस्थागत रूप ले लिया है। निजी और सरकारी/सार्वजनिक कंपनियां अपने मित्रों को मिट्टी के भाव बेची जा रही हैं और उनकी  Liabilities  बैंकों के माध्यम से बट्टे-खाते में डाली जा रही हैं। महंगाई और बेरोजगारी चरम पर पहुँच गयी है, लेकिन आम जनता को धर्म की ऐसी अफीम चटा दी गयी है कि वह बेसुध होकर 'उफ' तक नहीं कर पा रही है। आम आदमी अपने स्कूटर/बाइक में 108 रु लीटर पेट्रोल भरवा कर भी कह रहा है - आएगा तो मोदी ही! तो फिर हम-आप अपना असंतोष प्रकट करने के अलावा कर क्या सकते हैं? 

मुर्दा कौमें विद्रोह नहीं करती हैं!

लेखक/संकलक - Praveen Malhotra

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने