एक वीर की छवि का पतन
बचपन में जिनके नारे लगाए, जिन्हें कुछ साल पहले तक देश #वीर मानता था, जिन्हें 1857 की गाथा को जन-जन तक पहुँचाने वाला लेखक और हिंदुत्व की अलख जगाने वाला देशभक्त माना जाता था—उन्हें आपकी कुटिलताओं ने वीर से #माफीवीर बना दिया। 😔
1. भक्तिकाल का पाप: सावरकर की छवि पर प्रहार
2014 से शुरू हुए एक नए #भक्तिकाल में कई पाप हुए हैं, और उनमें सबसे बड़ा पाप है वीर सावरकर की "हत्या"। मुझे भी पढ़ने-लिखने का शौक रहा है, लेकिन 45 साल की उम्र पार करने के बाद हमारी पीढ़ी को पता चला कि कांग्रेसी सरकारें दशकों तक स्कूली किताबों में हमें झूठ पढ़ाती रहीं। वे विनायक दामोदर सावरकर को माफीवीर नहीं, बल्कि स्वातंत्र्यवीर बताती रहीं।
यह भी पता चला कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का सावरकर का शताब्दी वर्ष मनाने का निर्देश देना और डाक टिकट जारी करना उन सरकारों की भूल थी।
2. विदूषक सरकार की साजिश: सावरकर को बदनाम करना
नेहरू-गांधी को गिराने और "70 साल में कुछ नहीं हुआ" को #इति_सिद्धम करने के चक्कर में, #विदूषक होती सरकार ने धीरे-धीरे एक वीर की "हत्या" कर उसे माफीवीर बना दिया। विदूषक सरकार की कोख से जन्मे आईटी सेल, अंधभक्तों और गोदी मीडिया ने देश को यह बताया कि सावरकर ने एक नहीं, बल्कि 6-6 माफीनामे लिखे—वह भी पहला माफीनामा तो जेल में 2 महीने के भीतर ही!
यह भी आरोप लगाया गया कि उन्होंने:
- अंग्रेजों से 60 रुपये मासिक पेंशन ली।
- युवाओं को आजाद हिंद फौज में शामिल होने से रोका।
- जिन्ना के विभाजन के विचार को हवा दी।
- #गोमांस भक्षण का समर्थन किया।
- और यह कि वे गांधी की हत्या के मामले में गिरफ्तार हुए, जो मानवता के अभिमान थे।
3. काश ऐसा न हुआ होता: सावरकर की छवि का नुकसान
काश! "70 साल में कुछ नहीं हुआ-इति सिद्धम" वाली सरकार के लोग सावरकर को बुलबुल के पंखों पर बिठाकर अंडमान जेल से भारत भूमि की सैर न कराते।
काश! सरकारी इशारे पर चलने वाली व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी नेहरू को गाजी खान का वंशज और देश की सारी समस्याओं की जड़ न बताती, तो शायद सावरकर का गोमांस प्रेम भी सामने न आता।
काश! अपनी आत्मबलहीनता और नाकामियों को छुपाने के लिए नेहरू-गांधी के आकाशीय व्यक्तित्व पर दिमाग में भरा गोबर न फेंका जाता।
4. भस्मासुर की कहानी: खुद की गंदगी में दबे
गांधी-नेहरू का तो कुछ नहीं बिगड़ा, लेकिन वही गंदगी आसमान से वापस नीचे गिर रही है। यह भस्मासुर की कहानी को दोहरा रही है। आपकी #फेकी उसी गंदगी के नीचे दबकर, न जाने कितने दिलों में सावरकर का "वीर" मरकर माफीवीर बन चुका है।
5. अभी भी वक्त है: सावरकर को बचाएँ
लेकिन अभी भी वक्त है। अभी भी विनायक और उनके नाम के साथ जुड़ा उनके पिता का नाम #दामोदर और सरनेम सावरकर बचा हुआ है। कहीं ऐसा न हो कि आपकी विद्रूपताओं के चलते विनायक और दामोदर भी अतीत का दाग बन जाएँ।
निष्कर्ष: सावरकर को स्वातंत्र्यवीर बनाए रखें
मैं यह जानता था कि #RSSorg सावरकर से एक निश्चित दूरी बनाए रखता रहा है, लेकिन सरकार, आपने या आपके अपनों ने जो किया, वह ठीक नहीं था। सावरकर को "मारना" नहीं चाहिए था। काश! वे माफीवीर के बजाय #स्वातंत्र्यवीर सावरकर के रूप में ही हम भारतीयों के दिलों में जिंदा रहते। #Savarkar
Author - Sunil Singh Baghel